Monday, 19 November 2018

इसलिए_है_गोगामेड़ी_सो_कॉल्ड_बुद्धिजीवियों_के_निशाने_पर

#इसलिए_है_गोगामेड़ी_सो_कॉल्ड_बुद्धिजीवियों_के_निशाने_पर●●●

आजकल समाज का बुद्धिजीवी वर्ग आपराधिक छवि वाले लोगों द्वारा सामाजिक नेतृत्व हथिया लिए जाने काफी दुखी है| इन कथित बुद्धिजीवियों का कहना है कि आपराधिक छवि के लोगों का नेतृत्व चाहे किसी भी जाति वर्ग का हो वह खतरनाक है | एक बुद्धिजीवी ने फेसबुक पर अपना दुःख प्रकट करते हुए या फिर तंज कसते हुए लिखा कि- “मजे की बात यह है कि एससी -एसटी एक्ट के दुरुपयोग की आशंका भी वह सज्जन (?) जता रहे हैं, जो खुद हत्या, हत्या के प्रयास, जैसे कई आरोपों में घिरे रहे हैं और जेल यात्राओं के बावजूद बेरोजगारी – बेकारी जैसी समस्याओं से जूझते नौजवानों और समाज का नेतृत्व करने के लिए सज -धज कर तैयार हैं|”

बुद्धिजीवियों के इस तरह के पोस्ट पढ़कर ये तो साफ़ है कि करणी सेना को मिल रहे अपार समर्थन व करणी सेना में आपराधिक छवि वाले लोगों के नेतृत्व से समाज के बुद्धिजीवी काफी विचलित है| ये उनका दुःख भी हो सकता, करणी सेना की कामयाबी को लेकर उनके मन में जलन भी हो सकती है, सुखदेव सिंह गोगामेड़ी जैसे कम पढ़े लिखे व हत्या के प्रयास, जैसे आरोपों का सामना करने वाले नेताओं के आगे बढ़ने का डर है, ये तो वो ही जाने पर यह सच है कि आज देशभर के क्षत्रिय युवाओं की पहली पसंद करणी सेना ही है| पद्मावत मुद्दे पर विरोध हो, उपचुनावों में भाजपा को सबक सिखाना हो, हाल ही उज्जैन में आठ लाख से ज्यादा की भीड़ एकत्र कर शिवराजसिंह को अपनी भाषा बदलने के लिए मजबूर करना हो, ये काम करणी सेना, जय राजपुताना संघ व उन्हीं के सम्पर्क वाले विभिन्न क्षत्रिय संगठनों ने ही किया है| आपको बता दें सुखदेवसिंह गोगामेड़ी पर कई आपराधिक मुकदमें चल रहे हैं, ऐसे मुकदमें संसद में बैठे कई नेताओं पर चल रहे हैं, हमारा संविधान उसे ही दोषी मानता है जिसका अपराध न्यायलय में साबित हो जाए, बाकी आरोप किसी पर भी, कभी भी, कैसे भी लगाए जा सकते हैं, आरोप लगते ही किसी को आपराधिक पृष्ठभूमि का कहना भी गलत है| सुखदेव गोगामेड़ी पर भी आरोप है, जो अभी तक साबित नहीं हुए|

बेशक ये संगठन और खासकर सुखदेव सिंह गोगामेड़ी बुद्धिजीवियों के निशाने पर हों पर यह भी एक कड़वा सच है कि आज इन कथित बुद्धिजीवियों, सो कॉल्ड समाजसेवियों, राजनैतिक दलों में उपेक्षित राजपूत नेताओं की पूछ इन्हीं संगठनों के कारण बढ़ी है| अत: कथित बुद्धिजीवी व सो कॉल्ड समाज से

Sunday, 18 November 2018

राजपूत समाज वसुंधरा राजे को झालरापाटन में मुंह तोड़ जवाब देगा।

राजपूत समाज वसुंधरा राजे को झालरापाटन में मुंह तोड़ जवाब देगा।

इतना ही घमंड है तो पश्चिमी राजस्थान से चुनाव लड़ कर दिखाएं राजे।
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सर्व राजपूत संघर्ष समिति के प्रतिनिधियों ने कहा है कि मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को उन्हीं के निर्वाचन क्षेत्र झालरापाटन में राजनीतिक दृष्टि से मुंह तोड़ जवाब दिया जाएगा। कांगे्रस से मानवेन्द्र सिंह जसोल की उम्मीदवारी के संदर्भ में वसुंधरा राजे ने कहा था कि झालरापाटन से मेरे खिलाफ चुनाव लड़ने की किसी की भी हिम्मत नहीं हुई। इसलिए बाड़मेर से मानवेन्द्र सिंह को लाया गया है। संघर्ष समिति के प्रवक्ता और जय राजपूताना संघ के संस्थापक भंवर सिंह रेटा ने कहा कि चुनाव के समय भी वसुंधरा राजे राजपूतों को अपमानित करने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है। यदि सीएम राजे को अपनी राजनीतिक ताकत पर इतना ही घमंड है तो वह पश्चिमी राजस्थान जैसेलमेर, बाड़मेर आदि जिले के किसी भी विधानसभा क्षेत्र से लड़ने की हिम्मत दिखाए। 19 नवम्बर को भी नामांकन भरा जा सकता है। वसुंधरा को राजपूत समाज की इस चुनौती को स्वीकार करना चाहिएं। रेटा ने कहा कि पिछले पांच वर्षों में राजे ने सर्व राजपूत समाज को नाराज करने का कार्य ही किया है।
प्रमुख मुद्दों पर संघर्ष समिति का गठन कियाः
झालरापाटन में राजे के खिलाफ रणनीति बनाने के लिए संघर्ष समिति के सदस्यों गिरिराज सिंह लोटवाड़ा, रंजीत सिंह जेदिया, महिपाल मकराना, करण सिंह राठौड, रणजीत सिंह नोसल आदि जल्द ही बेठक करेंगे। राजे को इस मुगालते में नहीं रहना चाहिए कि वह चुनाव नहीं हार सकती है। प्रेम प्रकाश धूमल और शीला दीक्षित मुख्यमंत्री के पद पर रहते हुए चुनाव हारे। जब जनता खिलाफ होती है तो बड़े बड़े दिग्गज धराशायी हो जाते हैं। जहां तक स्वयं को झालावाड़ का स्थानीय और मानवेन्द्र को बाहरी बताने का सवाल है तो राजे तो राजस्थान की भी नहीं हैं। सब जानते है कि ग्वालियर की रहने वाली वसुंधरा राजे ने धौलपुर में विवाह किया। झालरापाटन और झालावाड़ से तो वसुंधरा राजे और उनके परिवार पर कोई सरोकार ही नहीं है। जबकि मानवेन्द्र सिंह तो इसी राजस्थान की भूमि में जन्में हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि फरवरी में हुए लोकसभा उपचुनाव में वसुंधरा राजे ने कोई सबक नहीं लिया है। इन चुनावों में सभी 17 विधानसभा सीटों पर वसुंधरा को हार का सामना करना पड़ा। रेटा ने कहा कि यह चुनाव भाजपा-कांग्रेस का नहीं बल्कि राजस्थान को वसुंधरा मुक्त करने वाला है।

संघर्ष समिति की रणनीति  की ओर अधिक जानकारी मोबाइल नम्बर 9413933337 पर रेटा से ली जा सकती है।
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Saturday, 17 November 2018

अहमदाबाद को फिर से कर्णावती के नाम से बदला जाए, Karni Sena

अहमदाबाद को फिर से कर्णावती के नाम से बदला जाए, तथा गुजरात में स्थित मुगलिया सल्तनत द्वारा बदले सभी शहर, नगर, कस्बों और धार्मिक स्थलों के नाम भी पुराने ऐतिहासिक नामकरण से बदले जाएं ...
राज शेखावत, श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना गुजरात

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उत्तरप्रदेश में योगी आदित्यनाथ जी नेतृत्व वाली भाजपा सरकार द्वारा जिस प्रकार से फैजाबाद जिले को फिर से अयोध्या के पौराणिक नाम से बदल दिया गया,
उसी प्रकार से गुजरात प्रदेश में भी विदेशी आक्रांताओ और मुगल शासकों द्वारा तलवार और बारुद के बल पर जो ऐतिहासिक एवं पौराणिक महत्व के नगर शहर एवं स्थलों के नाम बदल दिए गए,
उन्हें अब धर्म निरपेक्ष एवं लोकतांत्रिक शासन में, भाजपा के मोदी शासन में वापस पौराणिक नाम से बदलने की प्रधानमंत्री नरेन्द्र जी मोदी एवं गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपानी जी से मांग ...

Wednesday, 14 November 2018

लो मैडम कह रही, मुझे यूँही बदनाम किया ... कह रही राजपूत समाज को मैने तो पूरा सम्मान दिया

लो मैडम कह रही, मुझे यूँही बदनाम किया ... कह रही राजपूत समाज को मैने तो पूरा सम्मान दिया,

01) हाँ लोकसभा टिकटों समय 9 टिकट जाटों को, और तीन हम राजपूतों को ...

02) हाँ जसवंत सिंह जी जसोल को उस समय खून के आंसू नहीं, खुशी के आंसू आए थे ...

03) हाँ चतुर सिंह सोढ़ा को इन्होने निर्ममता से मारा नहीं, फिर भी हम राजपूतों के झूठे आरोप पर इन्होने उस जाट एसपी और हत्या सहयोग में पुलिस वालों को सस्पैंड किया, और उन सभी के खिलाफ सीबीआई जांच भी अपनी जबान चलाकर चालू कर दी ..

04) आनंदपाल जी को इन्होने नही मारा, फिर भी सीबीआई जाँच दी, एक नहीं दो दो ... एक पुलिस खिलाफ और दूसरी हम लोगों के खिलाफ.. 
हम न्याय की बात कर रहे लोगों खिलाफ सीबीआई जांच, इस लोकतंत्र में पहली बार ऐसा फैसला लिया जाता है, वो भी आपके राज में .....

05) सांवराद जयपुर और राजस्थान में एनकाउंटर जांच के लिए आंदोलनकारी 2,000 राजपूतों पर पुलिस मुकदमे नहीं लगा, उन्हें जेळ की जगह पंचसितारा होटलों और सीएम हाउस में मेहमाननबाजी करते ठहराया ...

06) हम लोगों के हर आरक्षण आंदोलन में मैडम ने सरकारी मदद दी, और मैडम तो खुद की पगड़ी उछाळ हम लोगों को सन 2003 में ही आरक्षण दे दिया ...

07) और भाजपा में ऐसे ऐसे राजपूत मिनिस्टर बनाए, जो आपके पास तो कभी आते ही नहीं, पार्टी धर्म छोड़.. 
वो लोग हम राजपूतों के ही काम करते, हर राजपूत विधायक को मैडम आपने कलेक्टर एसपी से ज्यादा पावर दे रखा,

08) और आप तो राजपूत को देखते ही इतना मान सम्मान देते कि हम लोग आपको कैसे भूल सकते ...

09) आपके शासन में हम राजपूतों साथ तो सभी जिलों शहर कस्बों में प्रशासन द्वारा कहीं अनाचार नहीं हुआ, जगह जगह से जो चार चालों से शिकायतें वो सब झूठी है..

10) हमारे समाज के कर्मचारी वर्ग और गिने चुने अफसर वर्ग का तो जैसे चार साल से राजाशाही राज हो, बढिया मनपसंद क्रीमी लेयर वाली जगह पोस्टिंग ...
किसी सिपाही चपरासी ड्राइवर चौकीदार मास्टर अफसर थानेदार, किसी को परेशान नहीं किया ...

11) हमें याद है, वो जयपुर राजमहल प्रकरण, हमारे पूर्वजो के
गढ महल किले हैरिटेज प्रौपर्टीज हथियाना, ऐसे अनेकों दृश्य हमारे मानस पटल पर छाए हुए, जिन्हें भूल नहीं सकते ...

12) हम भूले नहीं, हम आज भी देख रहे हैं वो सांवराद गाँव वाले अभियुक्त खुले घूमते ...
आप वसुंधरा जी के ही खासमखास सीटिंग एमएलए भैराराम सिओल ने खुद खड़े रह भीड़ को उकसाते हुए हमारे घरों दुकानों बाड़ों खेत खलिहानों में आग लगाई, और वहाँ लगातार दो रात आगजनी और लूटपाट करते रहे, और बार बार गुहार, सूचना मिलने बाद भी वहाँ पुलिस इमदाद नहीं पहुंचने दी... 

इसलिए मैडम जी सही है, यह सब आपके विरोधियों की चाल है, उन लोगों से आपका हम राजपूतों प्रति प्रेम देखा नही जाता😊
   
और कुछ मामूली संख्या में राजपूत आपको झूठा बदनाम कर रहे, आप तो निश्चित रहें, हर समाज आपके जयकारे कर रहा है ...

आपने तो राजस्थान को विकास मामले में आपके पसंदीदा लंदन शहर के जैसे बना दिया,
और आपके जैसा सुराज संकल्प और सुशासन भला कोई और दे सकता है ?
यह तो चंद राजनीतिक विरोधियों और मीडिया की चाल है ..

वे आपको झूठा बदनाम कर रहे, हम आपको एक के बदले दस दस वोट दिला लंदन का प्रधानमंत्री बनाएंगे ....

जय सुराज संकल्प, जय सुशासन जय जय राजस्थान...
      सावन में हरा हरा, और राजस्थान में वसुंधरा 😍

एक बार जरूर पढ़ें राजपूत समाज और प्रत्येक राजपूत समाज का युवा पोस्ट को शेयर जरूर कर दो!!

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*कमल का फूल राजपूत समाज की भूल*

बीजेपी के शासन काल में राजपूत समाज का युवा जो खून के आंसू रोया है उसका बदला लेने का वक्त यही है समाज के युवा भाइयों से निवेदन है इस बार बीजेपी के भूत पर नहीं बैठना है और आप समाज के कर्णधार हो समाज का भविष्य आपके ऊपर है आप घरों से वोट निकालते हो आप के कहने पर आपके घर के वोट गिरनी चाहिए इस बार के मतदान में

*बीजेपी को वोट नहीं देने के प्रमुख कारण समाज का युवा पढ़ ले और विचार कर ले*

1. राजस्थान में भाजपा की तानाशाही नीति राजपूत समाज के खिलाफ
2. समाज का युवा क्रांतिकारी चतुर सिंह सोढा का फर्जी एनकाउंटर
3. आनंदपाल सिंह का फर्जी एनकाउंटर
4. 12000 राजपूत भाइयों पर मुकदमे दर्ज इनमें से कई भाई सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले थे
5. 12000 राजपूत भाई पर जेल के अंदर जो जुल्म किया पेशाब पिलाया गया शरीर के बाल तक नहीं छोड़े गए
6. राजपूत समाज आनंदपाल की सांवराद श्रद्धांजलि सभा में पहुंचा वहां पर गांव में नहीं घुसने दिया और गाड़ियों को तोड़ा गया राजपूत समाज के युवा भाइयों को आर्थिक नुकसान पहुंचाया गया गाड़ियां जप्त कर ली गई
7. समाज इन अत्याचारों से परेशान होकर जब खून के आंसू रो रहा था उस वक्त यह बीजेपी के नेता होटलों में बैठकर राजपूत समाज के सामाजिक नेताओं के खिलाफ पंडोरा बॉक्स खोल रहे थे
8. सुरेंद्र सिंह मालासर एनकाउंटर
9. भवानी सिंह गुजरात एनकाउंटर सांवराद प्रकरण
10. भीम सिंह भाटी फर्जी एनकाउंटर
11. नीतू कंवर छाबड़ा काे सुसाइड करने के लिए मजबूर करना
12. *राजपूतो की आन बान शान हिंदुत्व की पहचान माँ पद्मावती का अपमान करना*
*पद्मावती अपमान के बारे में सुप्रीम कोर्ट को दोषी ठहराना और sc-st के समर्थन में सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ चले जाना याद रखना भाई लोगों*
13. जोधपुर का सामराऊ कांड जहां समाज की बहन बेटियों की इज्जत लूटी गई उनकी आबरू के साथ में खिलवाड़ किया गया
14. नागौर का चर्चित पप्पू सिंह डे प्रकरण हत्याकांड  इस हत्याकांड के एकमात्र गवाह और संघर्ष करने वाले बाबोसा सज्जन सिंह जी की रहस्य में हत्या
15. राजस्थान में राजपूत समाज ने कहीं पर भी राजस्थान में आंदोलन और विरोध प्रदर्शन किया उसका नेतृत्व करने वाले युवा भाइयों को किसी भी मामले में फंसाकर जेल में डालने का कार्य भाजपा की तानाशाही ने किया !!

*अब मेरा राजपूत समाज के युवा भाइयों से काकोसा बाबोसा बाईसा से निवेदन है जब भी 7 दिसंबर को मत देने के लिए जाओ उस दिन यह सारे मामले याद कर लेना और राजपूत समाज ने जो खून के आंसू रोए हैं उसका बदला लेने का वक्त 7 दिसंबर होगा*

राजस्थान विधानसभा में इस बार का मतदान बीजेपी के खिलाफ करना है अगर आपके पास में दूसरा कोई ऑप्शन है तो वहां मत कीजिए अन्यथा नोटा को मतदान करें और राजस्थान की राजनीति में एक नया आयाम जोड़ दें!!

*कमल का फूल राजपूत समाज की भूल*

*समस्त राजपूत समाज का युवा क्रांतिकारी*

गोगामेड़ी के पिछे पिछे कालवी जी

कालवी साहब द्वारा भी राम लल्ला मंदिर का समर्थन ... सुखदेव जी गोगामेड़ी जो भी करते, कालवी साहब और महिपाल जी मकराणा उसे फोलो जरूर करते, सिवाय कश्मीर के लालचौक पे झंडा फहराने को छोड़ के, क्योंकि वहाँ पे .... ....... वहाँ नहीं जा पाए।
कौन कहता है ? करणी सेना अलग अलग है और कालवी साहब सुखदेव जी से अलग है ...
अब कालवी साहब द्वारा भी रामलल्ला मंदिर (राजमहल) निर्माण की मांग ...
सुखदेव जी डाल डाल, तो कालवी साहब भी पात पात ...
देख ही लो, सुखदेव जी गोगामेड़ी ने जब 2014-15 में करणी सेना को राष्ट्रीय संगठन के हिसाब से विस्तार देना चाहा, और यूपी बिहार दिल्ली एमपी झारखंड में विस्तार किया तो कभी राजस्थान के तीन चार जिलों में ही सिमटी पड़ी, राजपूत करणी सेना के संरक्षक कालवी साहब को भी, इस बुढापे में, राज्य राज्य घूम कर, झूठे सच्चे करणी सेना अध्यक्ष घोषित करने पड़े थे ...
यहाँ तक कालवी साहब और महिपाल जी मकराणा की अगुआई वाली, श्री राजपूत करणी सेना ने साउथ में भी शुद्ध राजपूत ढूँढ ही लिए ....
[ पुराने क्षत्रियवंश एक खोज .... ]
और जब करणी सेना मुखिया सुखदेव दादा ने माफिया सरगना आनंदपाल सिंह के फर्जी एनकांउटर के विरोध में सांवराद गाँव में धरना दे वहाँ पड़ाव दे डाला ....
तो - ना चाहते हुए भी, कालवी साहब को आनंदपाल सिंह के पक्ष में जारी, राजपूतों और रावणा राजपूतों के आंदोलन के समर्थन में वहाँ आना पड़ा ...
पद्मावती फिल्म विरोधी आंदोलन को ही ले लो, मोदी सरकार के विरोध में आक्रामक राष्ट्रीय आंदोलन बन चुके, उस आंदोलन में भी, कालवी बाबोसा को स्टेट स्टेट भाजपा मुख्यमंत्रियों से मिलना पड़ा ....
और जब करणी सेना द्वारा विधानसभा घेराव, आर्थिक आधार पर बने सवर्णों के बोर्ड का घेराव करते हुए आर्थिक आधार पर आरक्षण की मांग की गई,
तो कालवी साहब को भी भले गोलमाल भाषा में ही सही, पर समाज को दिखाने के लिए, ऐन चुणावों के मौके, चित्तौड़ में रैली कर, आरक्षण की समीक्षा हो, सरकार से ऐसी मांग करनी पड़ी ....
और जब सुखदेव सिंह गोगामेड़ी ने अयोध्या से भगवान राम का वंशज होने नाते अयोध्या में राम लल्ला का मंदिर बनाने की बात कही ....
और इसपर भाजपा की मोदी सरकार को चेताया, तो घूम फिरकर कालवी साहब को भी अब आखिर सरयू घाट पर जा, अयोध्या में भगवान राम का मंदिर रूपी राजमहल बने, उक्त मांग करनी पड़ी ...
और अब उप चुनावों में भाजपा को पटकनी के बाद, विधानसभा चुनावों में भी सुखदेव जी गोगामेड़ी भाजपा सरकार विरोध में उतर चुके थे ....
तो कालवी बाबोसा को भी ना चाहते हुए भी झुठा सच्चा विरोध कर, समता आंदोलन के मिशन 59 में एससी/एसटी सीटों वाला गेम खेलना पड़ा ...

Tuesday, 13 November 2018

राजपूताना बलजी-भूरजी का सिर काटकर ले जाना चाहते थे अंग्रेज

Balji Bhurji : इन भाइयों की जोड़ी रॉबिनहुड का देशी वर्जन थी। इनकी जिंदगी की पूरी फिल्म देखनी है तो चले आइए राजस्थान के सीकर जिले के गांव पाटोदा।


प्रभाष नारनौलिया
लक्ष्मणगढ़ (सीकर) .


यह कहानी है अंग्रेजों के जमाने की। कमाल के दो ऐसे भाइयों की, जिन्होंने आन, बान और शान के लिए अंग्रेजों से बगावत की। बहादुरी से मुकाबला किया और मुंहतोड़ जवाब भी दिया। अंग्रेजों के दुश्मन और गरीबों के मसीहा इन भाइयों की जोड़ी रॉबिनहुड का देशी वर्जन थी। हमने आपको कहानी का थोड़ा सा हिस्सा सुनाया है। इनकी जिंदगी की पूरी फिल्म देखनी है तो चले आइए राजस्थान के सीकर जिले के गांव पाटोदा।


कौन थे बलजी-भूरजी


-पाटोदा गांव के भूरसिंह शेखावत अति साहसी, तेज मिजाज तथा रोबीले व्यक्तित्व के धनी व्यक्ति थे।
-उनके बड़े भाई बलसिंह शेखावत पाटोदा जागीर के ठाकुर थे।
-भूरसिंह के रोबीले व्यक्तित्व को देखकर अंग्रेजों ने उन्हें आउट आम्र्स रायफल्स में सीधे सूबेदार पद पर भर्ती कर लिया था।
-अचूक निशानेबाज तथा स्वाभिमानी भूरसिंह जल्द ही सभी भारतीय सिपाहियों के आदर्श बन गए।
-अंग्रेजों द्वारा भारतीय सिपाहियों के साथ किया जाने वाला दुव्र्यवहार भूरसिंह को बर्दाश्त नहीं होता था।
-इसी के चलते एक दिन उन्होंने अपने अंग्रेज अफसर की हत्या कर दी और वहां से फरार हो गए।
-वापस अपने गांव पाटोदा आकर उन्होंने सारी घटना की जानकारी बड़े भाई बलसिंह शेखावत को दी।
-ठाकुर बलसिंह भी अपने पूर्वजों डूंगरसिंह तथा जवाहरसिंह कीमौत का बदला लेना चाहते थे इसलिए वे भी भूरसिंह के साथ बागी जीवन जीने निकल गए।
-बागी होने के बाद दोनों भाइयों ने अमीरों एवं सेठ-साहूकारों को लूटना आरम्भ कर दिया।
-लूटा हुआ धन वे गरीबों को देते थे। दोनों भाइयों की जोड़ी बलजी-भूरजी के नाम से चर्चित होने लगी।
बलजी-भूरजी ने जोधपुर रियासत में डाले डाके
-बलजी-भूरजी ने जोधपुर रियासत में तो डाके डालने की श्रृंखला ही बना डाली। बलजी जहां धैर्यवान तथा मर्यादित स्वभाव के थे वहीं भूरजी तेज-तर्रार तथा गुस्सैल स्वभाव के थे।
-भूरजी के बारे में कहा जाता है कि जब उन्हें कुछ खास करने की जिद चढ़ती तो वे उस काम को पूरा करके ही दम लेते थे। चूंकि भूरजी अंग्रेजी सेना के बागी थे इसलिए अंग्रेज अफसर भी उनके पीछ़े पड़े हुए थे।
-अंग्रेजों को सबक सिखाने के लिए एक दिन भूरजी ने आम्र्स रायफल्स के नसीराबाद स्थित मुख्यालय से फिरंगी झण्डा उतारकर लाने का ऐलान कर दिया।
-भूरजी अंग्रेज अफसर की ड्रेस पहनकर उनके मुख्यालय पहुंच गए और उनके झण्डे को उतार लिया और वहां मौजूद सिपाहियों का सैल्यूट स्वीकार कर वापस बड़े आराम से आ गए।
-अंग्रेजों को जब तक माजरा समझ में आता तब तक भूरजी उनकी पहुंच से बहुत दूर निकल चुके थे। बाद में इसी झण्डे को भूरजी अपने ऊंट की पूंछ से बांधकर रखने लगे।
लोग राजा-महाराजा की तरह बलजी-भूरजी का स्वागत
लूट से मिले धन को वे गरीबों में बांट देते और हर जरूरतमन्द व असहाय की सहायता के लिए हमेशा तैयार रहते थे। इस कारण वे जहां भी जाते वहां के लोग उनका स्वागत राजा-महाराजा की तरह करते। दोनों भाइयों की छवि देशी रॉबिनहुड के रूप में चारों ओर फैल गई। स्वच्छन्द घूमते बलजी-भूरजी अंग्रेजों की नाक में हमेशा दम करके रखते। लेकिन, कहते है समय हमेशा एक सा नहीं रहता।
एक बार बलजी-भूरजी अपनी टोली के साथ डीडवाना होकर अजमेर जा रहे थे। रास्ते में उनकी मुठभेड़ जोधपुर रियासत के गुलाबसिंह नामक अधिकारी से हो गई जिसमें गुलाबसिंह की मृत्यु हो गई। कहा जाता है कि गुलाबसिंह की जनता में अच्छी छवि थी जिसके चलते बलजी-भूरजी के सामने कठिनाइयां आने लगी।
जोधपुर रियासत ने अपने जांबाज अधिकारी को खोने के बाद बलजी-भूरजी को पकडऩे का जिम्मा बख्तावर सिंह को सौंपा, जिनके बारे में कहा जाता था कि वह अधिकारी अपना काम पूरा करने से पहले घर नहीं लौटता था। बलजी-भूरजी को ढूंढ़ते-ढूंढ़ते एक दिन बख्तावर सिंह की उनसे मुठभेड़ हो गई।
बख्तावर सिंह के पास 300 से ज्यादा सिपाही थे जबकि बलजी-भूरजी की टोली में केवल 15 लोग थे। बख्तावर सिंह खुद भी बलजी-भूरजी से प्रभावित थे, इसलिए चाहते थे कि वे दोनों आत्मसमर्पण कर देवें लेकिन ऐसा संभव नहीं हुआ। मुठभेड़ में बलजी-भूरजी की मृत्यु हो गई। इसकी सूचना जोधपुर रियासत के साथ-साथ अंग्रेजों के पास भी पहुंची।


बलजी-भूरजी का सिर काटकर ले जाना चाहते थे अंग्रेज


अंग्रेज अधिकारी बलजी-भूरजी का सिर काटकर अपने साथ ले जाना चाहते थे लेकिन बख्तावर सिंह ने तथा आसपास के अन्य जागीरदारों के विरोध के कारण ऐसा संभव नहीं हुआ। कहा जाता है कि बलजी-भूरजी की मौत से बख्तावर सिंह को ग्लानि हुई और भूखा-प्यासा ही उनके शवों के पास चार दिनों तक बैठा रहा।

बाद में दोंनो का ससम्मान अंतिम संस्कार करवाकर ही बख्तावर सिंह अपने घर लौटा। बलजी-भूरजी की यह कहानी इतिहास के पन्नों में कहीं खो सी गई हंै लेकिन आज भी पुराने लोग उन्हें याद करते हैं। उनकी स्मृतिस्थल पर आज भी लोग जाकर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित करते हैं।